राहु-केतु के प्रभाव को कम करने के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

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हाइलाइट

ब्रह्मांड में राहु और केतु दोनों ग्रह दिखाई नहीं दे रहे हैं।
कुंडली में राहु का सकारात्मक प्रभाव भी देखा जाता है।

राहु-केतु उप: ज्योतिष के अनुसार ग्रहों का व्यक्ति के जीवन और आचरण पर बहुत प्रभाव पड़ता है। कुंडली में प्रत्येक ग्रह व्यक्ति के घर के अनुसार शुभ और अशुभ फल देता है। ज्योतिषी और पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा हम बात कर रहे हैं राहु और केतु दो ग्रहों की। इन दोनों ग्रहों की स्थिति के कारण आम आदमी हमेशा चिंतित रहता है। हालांकि ये दोनों ग्रह ब्रह्मांड में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं, लेकिन किसी व्यक्ति की कुंडली पर इनका प्रभाव बहुत बड़ा होता है। यदि यह ग्रह किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ स्थित हो, तो सूर्याग्रह दोष या चंद्र ग्रहण दोष हो सकता है।

राहु और केतु न केवल बुरे परिणाम देते हैं। कुछ लोगों की कुंडली में राहु और केतु ग्रह भी अच्छे परिणाम देते हैं। तो आइए जानें कि राहु और केतु ग्रहों की शांति के लिए हम क्या उपाय कर सकते हैं।

राहु का अशुभ प्रभाव

यदि किसी व्यक्ति को अचानक कोई घटना घटती है तो वह राहु के योग के कारण होता है। इसके अलावा डरावने, डरावने सपने, अचानक नींद में चौंकना राहु के अशुभ प्रभाव के लक्षण माने जाते हैं। शरीर में अचानक से भारीपन महसूस हो या मन को बेवजह का तनाव महसूस हो तो इन सबका कारण राहु है।

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राहु का शुभ प्रभाव

कुंडली में राहु के सकारात्मक प्रभाव से व्यक्ति को अपार धन की प्राप्ति होती है। साथ ही ऐसे लोगों की कल्पनाशक्ति तेज होती है। यदि कुंडली में राहु अच्छा हो तो व्यक्ति लेखक, दार्शनिक, वैज्ञानिक बन सकता है। राहु की युति वाले लोग आमतौर पर पुलिस या प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालते हैं।

केतु का अशुभ प्रभाव

यदि कुंडली में केतु ग्रह का प्रभाव नकारात्मक हो तो जातक की नींद में खलल पड़ता है। घर परिवार के पैसे का एक अनावश्यक खर्च है। इस ग्रह के प्रभाव से जोड़ों में दर्द, संतान प्राप्ति में रुकावट और घरेलू विवाद भी होते हैं। इसके अलावा कुंडली में केतु की अशुभ स्थिति के कारण संतान संबंधी परेशानी होती है।

केतु का शुभ प्रभाव

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु शुभ हो तो यह व्यक्ति को पद, मान, प्रतिष्ठा और संतान सुख देता है। इसके अलावा केतु के शुभ प्रभाव से जातक का मनोबल और स्थिति हमेशा बनी रहती है।

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राहु-केतु के उपाय

1. हिन्दू शास्त्रों और ज्योतिष शास्त्र में राहु-केतु की शांति के लिए कई उपाय बताए गए हैं, लेकिन इन सभी उपायों में सबसे तेज उपाय है पूरे दिन का उपवास। ऐसा माना जाता है कि राहु और केतु ग्रह की शांति के लिए 18 शनिवार तक व्रत रखने का नियम है।


2. राहु का व्रत करने के लिए काले वस्त्र धारण कर राहु के मंत्रों का जाप करना चाहिए।Om भ्रां भ्रं भोंसा: राहे नमः: शांति के लिए मंत्र और केतुOm श्रे केतवे नमः महिला श्रोणि के साथ:मंत्र का 18, 11 या 5 माला जाप करें। ऐसा करने से आपको जल्द ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

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